
जिम्मेदारों की उदासीनता से पलायन कराने वाले दलालों के हौसले बुलंद हैं।
मस्तूरी। नवरात्रि दशहरा खत्म होते ही बिचौलिए मस्तूरी क्षेत्र में सक्रिय हो गये है और लगातार रोजाना जोंधरा चिल्हाटी क्षेत्र से गरीब लोगों को पलायन करा रहे हैं। मस्तूरी क्षेत्र में इस बार पलायन करने वाले मजदूरों की संख्या बढऩे लगी है। खेती किसानी के कामों से मजदूर अब खाली हो गये है, शासन प्रशासन के पास अब मनरेगा जैसी काम भी नहीं चल रहा है,ऐसे में श्रमिक पलायन करने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि मजदूरी समाप्त होने के बाद भूमिहीन परिवार लगातार पलायन कर रहे हैं। कुछ दिनो बाद धान की कटाई शुरू हो जाएगी। खेती का काम होने के बाद पलायन करने वालों की तादाद और बढ़ेगी। सुत्रो की मानें तो मस्तूरी क्षेत्र से अब तक चार हजार से अधिक श्रमिक विभिन्न राज्य पलायन कर चुके हैं।पलायन करने वालों का नजारा रोजाना जोंधरा के बस स्टैंड में असानी से देखा जा सकता है। जो देर रात तक को शहर के लिए लगने वाली बसों में मजूदरों की संख्या अधिक नजर आ रही है। पिछली शाम को जोंधरा चिल्हाटी क्षेत्र से तीन दर्जन से अधिक मजदूर उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुए। जिसमें युवाओं की संख्या अधिक थी। क्षेत्र के लोग बिना रोज़गार के कारण अब रोजगार व आर्थिक संकट से जूझ रहे ,पलायन करने वाले मजदूरों ने बताया कि जिले में मनरेगा में पर्याप्त काम नहीं मिलने के कारण दुसरे शहर काम में जा रहे हैं। बरसात व आवास योजना के चलते गांव में मनरेगा के तहत काम भी नहीं चल रहे हैं। इसके चलते मजदूरों को पलायन करना पड़ता है। कटाई में हर्वेस्टर,धान के मीसाइ के लिए थ्रेसर आदि का उपयोग होने से अब खेती के कार्य में भी काम नहीं मिलना है। अगर कुछ दिन काम मिलेगा भी तो पर्याप्त पैसे नहीं मिलते है। वहीं शहर में 300 से 500 रुपए प्रतिदिन कमा सकते हैं। महिने में कम से कम 25 दिन काम मिल ही जाता है। क्षेत्र के मजदूर उत्तर प्रदेश,
जबलपुर, नागपुर, मुबंई, केरल अधिक पलायन करते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि अन्य राज्यों से लेबर सरदार बिचौलियों दलाल के माध्यम से पहले गांव आते हैं और यहां मजदूरों को अधिक मजदूरी देने का लालच और बस किराया देकर तैयार करते हैं। बस किराया पहले तो दलाल ही देते हैं बाद में इसकी वसूली मजदूरों से काम लेकर की जाती है। बिचौलियों दलालों को थाने व पंचायत में सूचना देना अनिवार्य किया गया है। इसके बाद भी चोरी छिपे मजदूरों को ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। मजदूरों को पलायन कराने के लिए गांव-गांव में दलाल सक्रिय हैं। इन्हें इसके बदले अच्छा खासा कमीशन मिल जाता है। इसकी लालच में वे मजदूरों को किसी भी प्रदेश में ले जाते हैं और उनकी मेहनत की कमाई का मोटा हिस्सा दलालों को मिल जाता है। इसके कारण कई स्थानीय लोग भी यह काम करने लगे हैं। यहां तक कि अब श्रम विभाग से अनुमति भी नहीं ली जा रही है।और न ही पंचायत में पलायन रजिस्टर का उपयोग किया जा रहा है जिसके चलते क्षेत्र के मजदूर बाहर प्रदेशों में जाकर बंधक भी बन जाते हैं।
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