
मस्तूरी थाना प्रभारी हरीश टांडेकर नहीं संभाल पा रहे हैं थाना ,सिपाहियों के भरोसे किया जा रहा है थाना का संचालन।
मस्तूरी थाना स्टाप ख़ुद दलालों से मिलकर करवाते हैं कमिशन में बोर खनन।
बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र से प्रशासनिक निष्क्रियता और कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम अवहेलना का एक गंभीर मामला सामने आया है। गर्मी के मौसम में गिरते जलस्तर को देखते हुए बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले में अवैध बोर खनन पर सख्त प्रतिबंध लगाया था। इस प्रतिबंध के बावजूद मस्तूरी क्षेत्र में अवैध बोर खनन का कार्य लगातार जारी है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शनिवार रात को मस्तूरी थाना से महज 500 मीटर की दूरी पर जयरामनगर मोड़ के पास अवैध रूप से बोर खनन किए जाने की जानकारी स्थानीय मीडिया कर्मियों को मिली। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग की। इसके बाद उन्होंने प्रशासन के उच्च अधिकारियों को लगातार फोन कर इस गैरकानूनी गतिविधि की जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि किसी भी अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया।
मजबूरी में इसकी सूचना मस्तूरी थाना पुलिस को दी गई, जिसके बाद एक प्रधान आरक्षक और एक आरक्षक मौके पर पहुंचे। तब तक बोर खनन का कार्य चल रहा था जिसका सूचना पेट्रोलिंग गाड़ी मस्तूरी को दिया गया मस्तूरी थाना में पदस्थ सचिन तिवारी ने मौके पर जाकर बंद कराया । पुलिस ने बोर मशीन संचालकों को अपना सामान समेटने और दोनों गाड़ियों को थाने लाने के निर्देश दिए साथ घंटों बोर गाड़ी में बैठे रहे हैं सचिन तिवारी आखिर ऐसा क्या हुआ कि वहां चुपके निकल गए पेट्रोलिंग गाड़ी को छोड़कर। लेकिन महज 30 मिनट के भीतर ही गाड़ियों को रास्ते में ही छोड़ दिया गया और थाने तक नहीं लाया गया, जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न हो गया है।
यह पहली बार नहीं है जब प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह की अवैध गतिविधियाँ हो रही हैं। इससे पहले भी जब अवैध बोर खनन की शिकायतें आई थीं, तब कलेक्टर ने सभी बोर मशीन मालिकों के साथ बैठक कर बोरिंग मशीनों में GPS सिस्टम लगाने का आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य था कि मशीनों की लोकेशन ट्रैक कर अवैध खनन को रोका जा सके। लेकिन जमीन पर इसका क्रियान्वयन न के बराबर दिख रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्तूरी क्षेत्र में प्रशासन के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और अधिकारी पूरी तरह से निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। लगातार शिकायतों और सबूतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी पहले की तरह दबा दिया जाएगा। जनहित और जल संरक्षण की दृष्टि से यह आवश्यक हो गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों और बोरिंग माफिया के बीच की सांठगांठ की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए।
Author Profile

Latest entries
UncategorizedFebruary 27, 2026शासकीय कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा की ऐतिहासिक सौगात – छत्तीसगढ़ कृषि अधिकारी संघ, बिलासपुर ने सरकार का जताया आभार”
UncategorizedFebruary 26, 2026गरियाबंद जिले में RAMP योजना अंतर्गत एक दिवसीय संवेदनशीलता कार्यक्रमों का सफल आयोजन
UncategorizedFebruary 24, 2026मजदूर एवं बच्चों को डोर टू डोर अभियान के तहतफाइलेरिया के दवाई खिलाई गई
UncategorizedFebruary 24, 2026मजदूर एवं बच्चों को डोर टू डोर अभियान के तहतफाइलेरिया के दवाई खिलाई गई
