
छत्तीसगढ़ राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पत्रकारों के ऊपर अत्याचार सोशल मीडिया कर्मचारी के ऊपर अत्याचार कर रही है वह इस प्रकार से है।
जिस प्रकार से आकांक्षा टोप्पो को षडयंत्र पूर्वक जेल में दाखिल किया गया क्योंकि आकांक्षा टोप्पो सोशल मीडिया कर्मी है और वह मुख्यमंत्री राज्य के अधीनस्थ मंत्रियों विधायकों की काली करतूत को उजागर करने वाली सोशल मीडिया कर्मचारी है और उसके खिलाफ में षडयंत्र पूर्वक प्रथम सूचना दर्ज करा कर उसे जेल के अंदर भिजवा रही है और आज पत्रकारों के ऊपर अत्याचार हो रही है जो कि सच का आईना और भारत सरकार एवं राज्य सरकार की चौथे अंग का काम करती है और उसे चौथ अंग को पूर्णता बर्बाद करने में तुली है यह कैसी प्रेस की स्वतंत्रता है प्रेस वालों को स्वतंत्र किया गया है मगर उनके आवाज को दमनकारी नीति से कुचला जा रहा है।
सरकार के अच्छे कार्य एवं बुरे कार्य का समाचार के माध्यम से जारी किया जाता है और भ्रष्टाचार्यों का घोटाले करने वालों का मामला उजागर होता है तो पत्रकारों को मारपीट एवं मर्डर कर दी जाती है वहीं पर न्यायपालिका भी सरकार के इशारे पर काम करती है न्यायपालिका को भी स्वतंत्र नहीं किया गया है आज जो भी फैसला होता है वह सरकार के पक्ष में होता है।
सुप्रीम कोर्ट का ऐलान है की सरकार की गुण दोष को उजागर करने वाले पत्रकार आलोचना करने वाले पत्रकार एवं सोशल वर्कर को स्वतंत्र किया जाए स्वतंत्र उनका रहने दिया जाए जो सरकार की अच्छे कार्य एवं बुरे कार्यों का समाचार के माध्यम से जनता के बीच में साझा करते हैं उनके कार्यों की ऐसे पत्रकारों को स्वतंत्र रखा जाए मगर वहां पर ऐसी स्थिति है कि पत्रकारों के ऊपर सोशल वर्कों के ऊपर दमनकारी नीति किया जा रहा है और दमनकारी नीति की वजह से प्रेस वालों के ऊपर दबाव बनाया जाता है यह कैसी लोकतंत्र है की प्रेस की आजादी पूर्ण रूप से नहीं है।
क्षेत्रीय विकास के संबंध में अगर कोई भी पत्रकार किसी भी विधायक किसी भी मंत्री से सवाल जवाब करता है तो उसे पत्रकार को भी संबंधित मंत्री संबंधित विधायक संबंधित सांसद मर्डर करवा देते हैं।
भारत देश आजाद हो गया पहले गोरे लोग शासन करते थे मगर आज सफेद वर्दी धारी नेता एवं खाकी पुलिस शासन कर रहे हैं जनता के ऊपर दबाव पूर्वक कार्य किया जाता है पुलिस केवल सरकार के इशारे पर काम कर रही है पुलिस को भी स्वतंत्र नहीं किया गया है।
समाचार के माध्यम राज्य के राज्यपाल एवं भारत देश के राष्ट्रपति को यह अपील किया जा रहा है की प्रेस की आजादी को राजनीतिक दलों का दबाव न बनाने का एक एजेंडा पारित किया जाए प्रेस को और सोशल मीडिया कर्मचारियों को स्वतंत्र कार्य करने की पूर्ण आजादी दी जाए और मीडिया कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान किया जाए क्योंकि पत्रकार सुरक्षा कानून बहुत ही जरूरी है पारित होना अगर ऐसा रहा तो सरकार के चौथे अंग एवं सच के आईना को सरकार 1 मिनट में समाप्त कर देगा और स्वयं शासन करेगी।
आकांक्षा टोप्पो क्षेत्रीय विकास के संबंध में ही संबंधित मंत्री संबंधित मुख्यमंत्री एवं अधिकारियों से सवाल जवाब करती थी यह सही कार्य था भले ही उसके भाषा शब्दों को व्यवस्थापिका और कार्यपालिका समझ नहीं रही है और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जेल में भेज देने के बाद क्या व्यवस्थापिका कार्यपालिका स्वतंत्र रह पाएगी क्या जीत उसी की होगी जो जेल में रहता है क्योंकि सच का आईना कभी झूठ नहीं होता।
शालिनी न्यूज़ एजेंसी संवाददाता राकेश कुमार साहू जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़।
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